Sunday, 9 July 2017

Mere parbhu

मैं आसमा की ज़िन्दगी  का तलबगार नहीं ,
मुझे नहीं चाँद तारों को पाने की चाहत,
मेरी आवाज को तेरी वफा की दरकार नहीं ,
तेरी वफा है खनकते सिक्को में ,
मेरी आवाज परवरदीगार के खाते में,
मेरे  परभू
मेरी हर  जीत तेरे खाते में मेरी हर  हार  तेरे खाते में .
©Adv Devendra Joshi