मैं आसमा की ज़िन्दगी का तलबगार नहीं ,
मुझे नहीं चाँद तारों को पाने की चाहत,
मेरी आवाज को तेरी वफा की दरकार नहीं ,
तेरी वफा है खनकते सिक्को में ,
मेरी आवाज परवरदीगार के खाते में,
मेरे परभू
मेरी हर जीत तेरे खाते में मेरी हर हार तेरे खाते में .
©Adv Devendra Joshi