मैं आसमा की ज़िन्दगी का तलबगार नहीं ,
मुझे नहीं चाँद तारों को पाने की चाहत,
मेरी आवाज को तेरी वफा की दरकार नहीं ,
तेरी वफा है खनकते सिक्को में ,
मेरी आवाज परवरदीगार के खाते में,
मेरे परभू
मेरी हर जीत तेरे खाते में मेरी हर हार तेरे खाते में .
©Adv Devendra Joshi
Sunday, 9 July 2017
Mere parbhu
Thursday, 12 January 2017
Dil se
मुद्दते लफ्फाजी की हो गयी
तेरा सितम वक़्त से आगे था
जो थी बातें अनकही
वो वक़्त कहता चला गया
मै था वक़्त की रेत पर
उलझते वक़्त की लटों को सुलझाता हुआ
तू था तेरा नाम था
गुरुर तेरा रब का मुकाम था
चर्चा मेरा सरे आम था
मै था मेरी तन्हाई थी
तुझ से जुदाई न चाही थी मैंने
पर वक़्त था
मै बेबस था अपनी बेवफाई पर
जो था वक़्त था
वक़्त की मुटठी में कैद था मै रेत की मानिंद
सरकती रही मेरी बेबसी तेरे रब बनने के साथ साथ
तू था , तेरी ऊंचाई थी , में था ,मेरी बेवफाई थी
उलझती रही लटें मेरी उमीदों की रेत के साथ साथ
गुरुर तेरा रब का मुकाम था
सरकती रही मेरी बेबसी तेरे रब बनने के साथ साथ
तू था , तेरी ऊंचाई थी , में था ,मेरी बेवफाई थी .
(C) Devendra Joshi
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