Friday, 16 September 2016

Remembering Damini

हर सुबह  का सूरज  लेगा  हिसाब
वक़्त की हार  का
वक़्त के वार  का
दामिनी  पर हुए हर प्रहार  का
स्याह हुइ संवेदना  का
हर  बंद हुए रास्ते का हिसाब देना होगा
तेरी चुप्पी का
मेरी चुप्पी का
शुन्य हुइ चेतना का
कल सुबह का सूरज
पैदा करेगा वो किरणे
जो उखाड फेंकेंगी बुर्जुआ राजनीती के चोंचलों को
और तुम  कहोगे बागी  है वो
और वो कहेंगे रोक सको तो रोक लो ........................

.(c)देवेन्द्र जोशी