हर सुबह का सूरज लेगा हिसाब
वक़्त की हार का
वक़्त के वार का
दामिनी पर हुए हर प्रहार का
स्याह हुइ संवेदना का
हर बंद हुए रास्ते का हिसाब देना होगा
तेरी चुप्पी का
मेरी चुप्पी का
शुन्य हुइ चेतना का
कल सुबह का सूरज
पैदा करेगा वो किरणे
जो उखाड फेंकेंगी बुर्जुआ राजनीती के चोंचलों को
और तुम कहोगे बागी है वो
और वो कहेंगे रोक सको तो रोक लो ........................
.(c)देवेन्द्र जोशी