अशआर मेरे असर डालेंगे यकीन है मुझे,
वफ़ा मेरी पाक है, इमान मेरा साफ है,
फरिस्ता हो जहाँ भी,यकीं है मुझको
मेरी आवाज़ में आवाज़ मिला, वो भी खड़ा है सजदे में ,
दूर तक जायेगी आवाज़
जो यकीं हो मुक्कमल
तेरी आवाज़,मेरी आवाज़, और इमानं फरिस्ते का,
दे आवाज़ में आवाज़ फरिश्ता यहीं खड़ा तेरे पास आयेगा।
Saturday, 26 September 2015
यक़ीन है मुझे
Sunday, 6 September 2015
life
न फना हो पाया, न जी पाया तुझे,
ऐ ज़िन्दगी तू ही बता,
महसूस तुझे सांसो से करू या मुक्क़दर से,
फना जो हो जाये मेरी बाँहों मे
तो जी भी लू तुझे चार दिन ,
वरना दिन दो और काम चार है ।
(C) devendra josh
ऐ ज़िन्दगी तू ही बता,
महसूस तुझे सांसो से करू या मुक्क़दर से,
फना जो हो जाये मेरी बाँहों मे
तो जी भी लू तुझे चार दिन ,
वरना दिन दो और काम चार है ।
(C) devendra josh
Dost
दोस्त बनकर जिन्होंने खंजर भोंका मेरी पीठ पर,
जिंदगी की अगली सुबह का सूरज,
उन्हें बता कर निकला कि
जिंदगी ने मेरे हाथ की लकीरों में इजाफा कर दिया
जिंदगी की अगली सुबह का सूरज,
उन्हें बता कर निकला कि
जिंदगी ने मेरे हाथ की लकीरों में इजाफा कर दिया
My journey
जहां से चला था वो मेरा अपना शहर था ,
तेरी बलखाती ज़ुल्फोन , तेरे नैनो की सुरमई तरकश से निकली मुस्कान के साथ,
वक़्त की किस्तियों को साथ लिए,
जहाँ पहुँचा वो शहर तेरा था,
में उड़ता चला उमीदों के आसमान में,
कुटिल मुस्कान तेरी,
बना रब का मुकाम तू,
मैं था गंगाजल अलकनंदा का,
वो था यमुना का पानी,
हर शब्द तेरा मीठा जहर था,
जहर पीता मैं इस शहर के चपेपे चपेपे घुमा,
ज़िंदा हूँ नीलकंठ हूँ,
पर प्रशन मेरे बाकी है?
उत्तर देना हो तो, मेरे शहर को आना,
बस शर्त यही है की, यमुना का पानी मन की आखों से धो लाना,
हो सके तो मेरे शहर आना............
तेरी बलखाती ज़ुल्फोन , तेरे नैनो की सुरमई तरकश से निकली मुस्कान के साथ,
वक़्त की किस्तियों को साथ लिए,
जहाँ पहुँचा वो शहर तेरा था,
में उड़ता चला उमीदों के आसमान में,
कुटिल मुस्कान तेरी,
बना रब का मुकाम तू,
मैं था गंगाजल अलकनंदा का,
वो था यमुना का पानी,
हर शब्द तेरा मीठा जहर था,
जहर पीता मैं इस शहर के चपेपे चपेपे घुमा,
ज़िंदा हूँ नीलकंठ हूँ,
पर प्रशन मेरे बाकी है?
उत्तर देना हो तो, मेरे शहर को आना,
बस शर्त यही है की, यमुना का पानी मन की आखों से धो लाना,
हो सके तो मेरे शहर आना............
© devendra joshi
rat
Rat bahut beet chalee, khawabo ko parwan chadne do,
Kal dekhenge khuli aankho se sapne ,
Abhi to aagaz hai, anzam tak pahuchne do.
© devendra joshi
Kal dekhenge khuli aankho se sapne ,
Abhi to aagaz hai, anzam tak pahuchne do.
© devendra joshi
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