Sunday, 22 November 2015

Time to time

वक़्त की रेत पर चलते रहे, फ़िसलते रहे,
गिरते रहे तेरी हर बेवफाई के साथ,
तेरे हर वार ने सिखाया चलना, तेरे शहर के रास्तों पे,
याद बहुत आये पथरीले रास्तों पे खड़े साफदिल लोग,
जब वास्ता पड़ा तेरे शहर की मखमली सड़क पर खड़े पथरीले लोगो से।

Saturday, 26 September 2015

यक़ीन है मुझे

अशआर मेरे असर डालेंगे यकीन है मुझे,
वफ़ा मेरी पाक है, इमान मेरा साफ है,
फरिस्ता हो जहाँ भी,यकीं है मुझको
मेरी आवाज़ में आवाज़ मिला, वो भी खड़ा है सजदे में ,
दूर तक जायेगी आवाज़
जो यकीं हो मुक्कमल
तेरी आवाज़,मेरी आवाज़, और इमानं फरिस्ते  का,
दे आवाज़ में आवाज़ फरिश्ता यहीं खड़ा तेरे पास आयेगा।

Sunday, 6 September 2015

life

न फना हो पाया, न जी पाया तुझे,
ऐ ज़िन्दगी तू ही बता,
महसूस तुझे सांसो से करू या मुक्क़दर से,
फना जो हो जाये मेरी बाँहों मे
तो जी भी लू तुझे चार दिन ,
वरना दिन दो और काम चार है ।
(C) devendra josh

Dost

दोस्त बनकर जिन्होंने खंजर भोंका मेरी पीठ पर,
जिंदगी की अगली सुबह का सूरज,
उन्हें बता कर निकला कि 
जिंदगी ने मेरे हाथ की लकीरों में इजाफा कर दिया

My journey



जहां से चला था वो मेरा अपना शहर था ,
तेरी बलखाती ज़ुल्फोन , तेरे नैनो की सुरमई तरकश से निकली मुस्कान के साथ,
वक़्त की किस्तियों को साथ लिए,
जहाँ पहुँचा वो शहर तेरा था,
में उड़ता चला उमीदों के आसमान में,
कुटिल मुस्कान तेरी,
बना रब का मुकाम तू,
मैं था गंगाजल अलकनंदा का,
वो था यमुना का पानी,
हर शब्द तेरा मीठा जहर था,
जहर पीता मैं इस शहर के चपेपे चपेपे घुमा,
ज़िंदा हूँ नीलकंठ हूँ,
पर प्रशन मेरे बाकी है?
उत्तर देना हो तो, मेरे शहर को आना,
बस शर्त यही है की, यमुना का पानी मन की आखों से धो लाना,
हो सके तो मेरे शहर आना............
© devendra joshi

rat

Rat bahut beet chalee, khawabo ko parwan chadne do,
Kal dekhenge khuli aankho se sapne ,
Abhi to aagaz hai, anzam tak pahuchne do.
© devendra joshi